गुरुवार, 2 अगस्त 2018

चपत /थप्पड़ (लघु -कथा )

                                                                 लघु-कथा 

                                                             चपत /थप्पड़

एक भिखारिन नाबालिग लड़की फटेहाल कपड़ों में सड़क के किनारे बैठ कर आते-जाते लोगों से भीख    मांग रही थीकोई उसे दुत्कार के चला जात ,तो कोई तरस खा के 1-2  के सिक्के उसकी झोली में फैंक कर चला जाता . मगर उसे तो बड़ी   भूख  लगी थी उसका तो यह जी चाह रहा था की उसे कुछ खाने को देदे। पिछले  दो  दिनों से   वो भूखी थी ,और   कुछ  बीमार भी  लग रही थी कमजोरी के  मारे उससे बोला भी  नहीं जा रहा था। मगर किसी  को  उसकी  इस हालत से कोई  सरोकार नहीं था .हां  !  अगर  था भी  तो  उसके  तार -तार  कपड़ो से झांकते नव- यौवन से. विकृत  मानसिकता  से लबरेज़  घूरती  निगाहों का वोह निशाना बनी हुई थी ,वहीँ  सभ्रांत महिलायों   की आँखों  से  छलकती नफरत की भी .
                            
उस  मजबूर और बेसहारा लड़की  की हालत  पर तमाशबीन  बने  लोगों  में  एक अधेड़  उम्र का  शख्स  भी वहीँ मौजूद था ,वोह दिखने  में  कुछ सभ्य , सुशिक्षित  और   सज्जन  लग रहा था  . उस लड़की  के पास  आया ,उसे  आँखों से   टटोला  और धीरे  से फुफुसाते  हुए   बोल ,''   ऐ लड़की!  तू यहाँ कब  तक बैठी  रहेगी ? चल उठ  मेरे साथ चल . ''   वोह  लड़की सवालिया निगाहों से  उसकी तरफ दिखने  लगी .
           '' 
देख क्या रही है !  चल  ,हां ! हां !   मैं तुझे कुछ  खाने को देता हूँ ,  तुझे बड़ी भूख लगी है  ,है ना !'
वोह मासूम   लड़की  ख़ुशी से उठ  खड़ी हुई  और चहकते हुए  बोली  ,''  सच  साब जी ! आप मुझे  खाने  को  दोगे ? ''  
             
अधेड़ शख्स ,''   हां  बाबा  हां  !   खाना भी और पहनने को कपड़े भी ,मगर तुझे  मुझे  खुश  करना होगा ''  
           ''खुश करना होगा ! कैसे ?  अच्छा !  कोई गीत सुनना होगा, और नाच के दिखाना होगा ,है  ना !  साब जी मुझे सब आता है, मैं आपके घर का सारा काम भी कर दूंगी , बस कुछ खिला दो ! ''
लड़की ने एक मासूम बच्ची की तरह  इठलाकर कहा. 
          '' हाँ-हाँ !तू चल तो सही , तुझे सब बताता हूँ ,''  अधेड़ आदमी ने उसकी बांह पकडनी चाही. लड़की ने अपनी बांह छुड़ा ली और कहा ,'' अच्छा ! ज़रा रुकिए  '' इतना कहकर सड़क के दूसरी और बैठे  अपने भाई को आवाज़ देकर बुलाया और अधेड़ आदमी की सारी बात उसे बता दी. उसका भाई अधेड़ आदमी के पास आया अपनी बहिन का हाथ पकड़ लिया और अपने साथ १-२ लोगों को और ले लिया औरअधेड़  आदमी के पास आकर कहा '' चलिए साब !  ''  अधेड़ आदमी के हाथों के तोते उड़ गए और वोह फटाफट अपनी गाडी में जाकर बैठ गया और वहाँ से रफू-चक्कर हो गया. कहाँ तो एक मासूम और मजबूर लड़की की आबरू लुटने आया था, और अपनी ही आबरू  खतरे में पड़  गयी . वसे तो वोह लड़का उस मासूम  बालिका का कुछ लगता  नहीं था, उसकी तरह ही एक भिखारी था ,मगर  उस  मासूम ,गरीब, मजबूर लड़की का उसने ऐसी मुश्किल में हाथ  जो पकड़ा उस लड़की का आत्म-विशवास बढ़ गया  और वहां मौजूद लोगों को चपत लगी तो लगी उस अधेड़ ,कामी, मक्कार आदमी के मंह पर भी  करारी चपत पड़ी. की उसे अपना सा मुंह लेकर  भागना पड़ा.