दामिनी ( कहानी )
अरुणा अपना सारा
घर पूरी तरह से व्यवस्थित के बाद तब आराम से dinning टेबल से अखबार उठाकर,सोफे पर
बैठ गयी और उसकी हैडिंगस पर सरसरी नज़र डालने लगी. अरुणा
की यह रोज़ की आदत है ,कुछ खास खबर हो तो पूरा पढने लगती है अन्यथा ख़बरों के शीर्षक पढके अख़बार छोड़ देती है मगर आज एक फिर
दिल दहला देने वाली खबर ने उसे परेशां कर दिया. ‘’एक ८ साल की मासूम
बच्ची के साथ ८ अधेड़ उम्र के
आदमीयों ने किया
बलात्कार . जानवर कहीं के !
जानवर भी इन्हें कह सकते क्योंकि जानवर भी
ऐसे नहीं होते ,इन्हें जानवर कहना जानवर की भी तोहीन है. इन्हें वेह्शी,दरिन्दे
,राक्षस ,चंडाल कहना ही उचित होगा. हाय
राम ! पोती की उम्र की बच्ची
और उसके साथ ऐसा जानवरों जैसा सलूक !
मगर इनके लिए रिश्ते नाते कहाँ कोई एहमियत रखते हैं? पोती की उम्र की हो या बेटी ,माँ,बहिन ,नाती की
उम्र की ही क्यों ना हो , इन वासना के
भूखे भेड़ियों को औरत चाहिए
बस !
अपनी इस घिनोने दिमाग से
निकली कुत्सित विचारधारा के आगे
वोह रिश्तों की मर्यादा , समाज की शर्म सब ताक पर रख
देते हैं. इनका ज़मीर तो मर ही चुका है. मगर लगता है उनका भी ज़मीर मर चुका है जो इनको बड़े नाजों से सरकारी दामाद की तरह पालते पोसते हैं. जेल इनके लिए कोई सज़ा काटने का
भयानक कारागाह नहीं आराम गाह होता है. तभी तो बड़ी आसानी से ज़मानत से भी छुट जाते हैं. पुलिस-प्रशासन
जो रिश्वत खोर और भ्रष्टाचार से सर से
पांव तक लिप्त है उनका भी ज़मीर मर चुका है
,उनका धर्म –ईमान सब पैसा है. . और यह सरकार ! इनसे तो कुछ नहीं होने वाला.
इन्हें तो बस नारे बाजी, रैलीयां और
लुभावने भाषण और भाषणों मैं बड़े-बड़े दिलकश
आश्वसन बस यही देना आता है. और कुछ नहीं आता. कुछ भी नहीं आता. सभी रजनीतिक दल सत्ता
के लिए ,जितना भी गिरना चाहे कम है. सबके हाथ
अपराध ,भ्रष्टाचार ,बईमानी, की कालिख से सने हुए हैं. सफ़ेद पोश अपराधी
है ये भी. कोई कम नहीं है. और कानून
की तो पूछो ही मत ,उसकी तो कोई
औकात ही नहीं रह गयी देश मैं. तभी कितनी ही निर्भयायें हर रोज़
किसी न किसी दरिन्दे का शिकार होती है और कोई इन्साफ ही नहीं हो पाता.
निर्भया के अपराधियों को कौन सी
फांसी मिल गयी अब तक! बस एलान हो गया की फांसी मिलेगी .मिली तो नहीं ना. काश उस निर्भया के
साथ सही इन्साफ होता तो आज कोई और निर्भया वासना के भूखे भेड़ियों /दरिंदों का शिकार ना होती. मगर ऐसा हो ना सका . तभी तो आजकल
हर रोज़ की ख़बरों में देश के किसी भी कौने से , किसी भी शहर से हर रोज़
बलात्कार की ख़बरें होती ही हैं . पहले तो मात्र युवा लड़किओं को शिकार बनाया जाता था , अब
तो छोटी-छोटी बच्चियां , दुधमुंही
बच्चियां को भी ...
हे भगवान् ! यह तेरी दुनिया मैं
क्या हो रहा है ? और तू इन सब से अनजान ! तू है कहाँ ? तू है भी के नहीं. !
हाय !
बेचारी बच्ची ने क्या बिगड़ा था इनका. ज़रा
भी दया नहीं आई इस फूल से बच्ची पर’’ अरुणा के मन-मस्तिष्क मे जो दर्द ,पीड़ा ,
अक्षोभ ,दुःख आदि की काली घनघोर घटायें बन
पड़ी थी एक का एक आंसू बनकर जार-जार आंखों के दरीचों से बह निकली. तभी
कॉल बेल बजी और उसकी तंद्रा टूटी और कुछ सहम सी गयी. शायद हाल ही मैं पढ़ी
खबर का असर था.’ अरुणा
सोफे से उठी और बैठक के मुख्य दरवाज़े की मैजिक आई से पहले देखने लगी की कौन है. उसी कोई औरत दिखाई
दी. लगा कमला होगी फिर भी उसने अन्दर से आवाज़ लगायी ‘’कौन है ?’’ बाहर से आवाज़ आई ‘’ मैं हूँ बीबीजी ! कमला !’’ अरुणा की जान में जान आई ,उसने कमला को
दरवाजा खोला . तो सामने कमला ही थी .
उसकी मैड . अरुणा ने दरवाज़ा
खोल दिया और अरुणा अन्दर आ गयी और देखते ही बोली ‘’राम ! राम ! बीबीजी ! कैसे हो ? कुछ परेशां लग रहे हो,क्या
बात है? तबियत तो ठीक ही ना आपकी ? ‘’ अरुणा –‘’मुझे क्या हुआ ? हाँ मैं ठीक हूँ,
तू अपनी बता,आज तो टाइम पर आ गयी
,क्या बात है? ‘’ कमला –‘’ हाँ बीबीजी ! मैने सोचा की कल शाम
को नहीं आ पाई थी आप के घर कम को ,तो काम बहुत होगा ,तो इसीलिए आज जल्दी चली आई ‘’ अरुणा ‘’’ कल शाम को तू कहाँ गयी थी ,जो आइ काम को ?
‘’ कमला – ‘’ ओह्हो ! बीबीजी ! बताई नहीं थी क्या आपको , डोक्टर के पास जाना है चेक-अप करवाने ,ultrasound भी करवा लिया .’’ अरुणा –‘’
अरे हाँ याद आ गया, मेरा दिमांग भी ना ! आज कल बहुत भूलने लगी हूँ मैं. तुझे डोक्टर को
दिखाना था , और !! क्या कहा डोक्टर ने ? और उत्ल्रा साउंड क्यों ? ‘’ कमला
ने शर्माते हुए कहा ,’’ बीबीजी ! मैं वोह
! मैं वोह ! ‘’ अरुणा –‘’ क्या मैं वोह ,मैं वोह ! कुछ बोलेगी भी ? ‘’ कमला – ‘’ अब समझ जाओ ना आप खुद ही , ‘’
अरुणा
ने कमला के चेहरे के हाव-भाव पढ़ लिए और
ताड़ ही लिया ‘’’अच्छा ! समझ गयी , तो माँ बनने वाली है ,यह तो बड़ी ख़ुशी की बात
है,? और यह क्या खाली हाथ आई है कुछ मीठा
तो लाती मुंह मीठा करने को , अच्छा ! चल
छोड़ मैं करती हूँ तेरा मुंह मीठा ‘’ इतना कहकर अरुणा ने फ्रिज से
रसगुल्ले का डिब्बा निकाला और ठंडा –ठंडा रसगुल्ला कमला को खिलाया ,और खुद
भी खाया. कमला ने कहा- ‘’thanku ! बीबीजी
! ‘’ अरुणा –‘’और क्या बताया डोक्टर ने ?
बच्चा ठीक है ना ! ‘’अच्छा !! तो इसीलिए करवाया होगा तूने ultrasound ,जाने के लिए की बच्चा
ठीक पोजीशन पर है न, ठीक से grow कर रहा
है है न ! इसीलिए न ! ‘’ कमला – ‘’ हाँ जी ठीक है, बच्चातो ,बच्चा नहीं बच्ची है ! , (कमला कुछ मायूस सी हो गयी ) अरुणा- “” तू इतनी उदास
क्यों हो गयी ? तुझे तो खुश होना चाहिए ,बेटा है या
बेटी ,होती तो बा-बाप की संतान ही न. भगवान् ने तेरी गोद हरी कर दी ,शादी के
बरसों बाद ,फिर यह उदासी क्यों? बेटियां
आज कल बेटों से किसी बात मैं,किसी काम मैं कम नहीं है समझे! ‘’ कमला –‘’ बात तो आप ठीक कह रहे हो , मैं भी खुश हूँ, मगर मेरा मर्द नहीं मानता ,वोह कहता है
समय रहते गिरवा दे ,वर्ना फिर दिल मैं मोह आ गया तो नहीं गिरवा पाएंगे. ‘’ अरुणा को
गुस्सा आ गया –‘’ पागल है क्या
वोह ? तेरा मर्द , तू समझाती क्यों
नहीं इतने बरसों बाद भगवान् औलाद दे रहा है , और वोह बच्ची गिरवाने की बात कर रहा है, ?खिलौना समझ रखा है क्या ,? कोई खेल है क्या यह? यह तो बहुत बड़ी ना
इंसाफी कर रहा है तेरा मर्द , उसे रोक ! यह पाप है, और कानून की नज़र मैं अपराध भी
. ‘’ अरुणा एक दम रोष मैं आ गयी. कमला -
‘’ मैं भी कहाँ कोई फरक समझती हूँ ,बेटा और बेटी मैं,
! मैने देखा नहीं क्या टीवी और अख़बारों
मैं, बेटियां आज कल बेटों से ज्यदा नाम कमा रही हैं माता-पिता का , और बूढ़े होने पर सेवा भी
वही करती हैं, बेटे तो शादी करके अलग हो
जाते हैं, और बीबीजी ! मेरा तो एक सपना भी
था यदि भगवान् ने मुझे बेटी दी तो आपकी
नेहा बिटिया की तरह उसे डोक्टर
बनायुंगी . डोक्टर नहीं तो पुलिस इंस्पेक्टर तो ज़रूर बनायुंगी. मगर !
इसका क्या करूँ ,? अपने मर्द का . उसका दिमाग मोटा है. कोई बात उसके पल्ले
पढ़ती नहीं. ‘’ अरुणा –‘’ वैसे !वोह क्यों मना कर रहा है बेटी जनने के लिए ,इसका कोई तो कारण होगा ? ‘’ कमला –‘’ रोज़-रोज़ की बलात्कार के हादसों की वजह से
! हाँ
बीबीजी ! आज कल देख नहीं रहे आप ,? रोज़ पढ़ते भी होंगे ,हमारे आस-पास भी हर रोज़ ऐसी
घटनाएँ होती रहती हैं, जवान तो जवान ,छोटी छोटी बच्चियों , नवजात बच्चियों
,को भी आजकल यह इंसानी भेडिये , दरिन्दे अपनी हवास का शिकार
बना रहे हैं. और वोह भी इतने बुरे तरीके से ,के पूछो ,बिलकुल वहशी बन गए हैं. बच्ची मर भी जाती है तो भी उसकी लाश
के साथ .. हे भगवन ! और तो और
बच्चियां गैर तो गैर ,अपने
रिश्ते-नातों, पड़ोसियों से भी सुरक्षित नहीं है. आज कल लोगों मैं रिश्तों की
मर्यादा ,शर्म –लिहाज़ तो है नहीं , फिर ऐसे में बहुत डर लगता है क्या करें? ‘’ अरुणा एक दम सकपका गयी ,सुबह की भयानक खबर उसके दिमाग पर फिर से घुमने लग गयी . उसने कमला
से कहा ‘’ बात तो ठीक है इसमें कोई शक नहीं, मुझे भी कई बार अपनी बेटी की चिंता बनी रहती है ,परदेस
मैं रहती है बेचारी ,भगवन से दुआ करती हूँ जल्दी से पढाई पूरी हो तो जल्दी से घर आ जाये ,एक ही तो बेटी है हमारी , भगवान् उसकी
रक्षा करे, मुझे भी डर लगता रहता है ,
इनके (विवेक ) के दफ्तर जाने के बाद , माना
की आज कल समाज में
बलात्कार एक भयंकर संक्रमण की तरह फैला हुआ है, किसी आदमी में वेह्शी / दरिंदा छुपा पड़ा है हमें क्या पता. मगर इसका मतलब यह नहीं
की हम बेटियों को जनना छोड़ दें . हम बेटिओं को काबिल बना सकते हैं की वोह अपनी
रक्षा खुद करें, अब समय आ गया है, बेटियों के हाथ मैं कलम के साथ तलवार,पिस्टल
,बन्दुक थमाई जाये. हमारी बेटियों को अब दुर्गा बनना होगा. उन्हें आत्म-रक्षा का प्रशिक्षण देना होगा. और
बल्कि हर औरत को सीखना होगा. ताकि वोह
अपनी भी रक्षा कर सके और अपनी बेटियों ,बहनों ,बुज़ुर्ग महिलाओं की भी रक्षा कर
सकें ‘’ और कमला की ओर मुखातिब होकर बोली ‘’ और तू आज मेरे
सामने वचन ले ,की चाहे कुछ हो , तू यह
गर्भ नहीं गिरवायेगी ,तेरे आदमी को यह मासूम
यदि बहुत बोझ लग रही है ,तो मुझे दे दो. में इसकी
ज़िम्मेदारी लेने को तैयार हूँ. अमानत यह
तेरी ही रहेगी , मगर पलेगी मेरे घर ,क्यों
मंजूर है न बोल ? कमाल है भई ! नवरात्रों
मैं तो पुरे व्रत रखते हो , कन्या पूजते हो , और माता रानी अगर कृपया करके
कन्या के रूप मैं तुम्हारे घर खुद जन्म ले रही है तो उसे मार डालना चाहते
हो,क्यों? ‘’नहीं- नहीं बीबीजी ! मारना
नहीं चाहते हम ‘’’कमला की बात काटते हुए ‘’किसी अजन्में बच्चे को आने से रोकने
के लिए उसे गर्भ मैं ही खत्म करना ,मारना
ही कहा जाएगा ,यह भी एक तरह की ह्त्या ही है ,समझी! वोह आदमी है कठोर हो
सकता है ,मगर तू तो एक औरत है ,एक औरत को दुनिया मैं आने से रोक रही है, अरे तू
माँ है कमला ! तू माँ है ऐसे कैसे कर सकती है तू ? “” अरुणा के मुंह से कड़वी मगर
सच्ची बात सुनकर कमला के पैरों के निचे से ज़मीं खिसक गयी. वोह दुःख और क्रोध मैं कुछ बुदबुदाने लगी ,मैं ऐसा बिलकुल
नहीं होने दूंगी’’ , कमला का बुदबुदाना
अरुणा ने सुन लिया उसकी जोशपूर्ण बातों से उसके अटल निर्णय से लगा ,अरुणा का क्रोध
ठंडा हुआ और उसे विश्वास हो गया की अब कमला
किसी से नहीं डरेगी ,अपने मर्द से भी
नहीं. उसने प्रण ले लिया है की
उसने अपने गर्भस्थ शिशु- कन्या को
जन्म देना है तो देना है, यह उसकी मर्ज़ी
है, आखिर वोह एक माँ है, एक माँ अपने अंश
को कैसे
जन्म लेने से पहले ही मार सकती है, फिर वोह माँ थोड़े ही हुई वो डायन हो
गयी. और वोह डायन नहीं है. एक अजन्मे बच्चे पर उसके बाप से ज़ायेदा माँ का हक होता है. अब कमला के दिल मैं आत्म-विश्वास जाग उठा था. और उसके मुख पर
आत्म-विश्वास की चमक देखकर अरुणा के मुख पर भी विजयी भाव लिए मुस्कान खिल गयी.
कमला ने अरुणा से कहा ‘’’ बीबीजी ! आप एक दम ठीक कह रही हैं, आपकी बातों
से मुझमें भी एक नयी ऊर्जा/शक्ति का संचार हुआ है, मैं आपको वचन देती हूँ,
की मैं इस औलाद को ज़रूर जनुगी .और इसका पालन-पोषण अच्छे तरीके से हो सके, यह बड़ी
होकर बहादुर पुलिस अफसर बने इसके लिए मैं
इसे आपके ही आश्रय मैं रखूंगी. और
आप ठीक कहते हो, अब समय आ गया है हर औरत
को दुर्गा का अवतार लेने का. ताकि वोह
बड़ी बहादुरी से निपट सके अपने घर के शैतान से भी और घर के बाहर के शैतान से
भी.और मैं तो उसका नाम भी बड़ा ज़बरदस्त रखने वाली हूँ, मैने सोच लिया है .मेरी बेटी
का नाम होगा ‘’दामिनी’’ .बिजली बनकर टूट पड़ेगी ,हाँ ! ! अगर किसी लुच्चे टाइप के
आदमी ने नज़र भी उसकी और उठाई तो . मैं अब अपने मर्द के हर सवालों का जवाब देने को
तैयार हूँ. आप चिंता मत करो ,अब जैसा आपने कहा वैसा ही होगा.’’ कमला के
क्रांतिकारी बदलाव से अरुणा बहुत खुश हुई और बड़े स्नेह से उसके सर पर हाथ फेरा
और झूठ मुठ गुस्सा दिखाकर प्यार मैं बोली
‘’ अच्छा ! अच्छा ! तू आज ही जाकर अपने
घरवाले की खबर लेना ,मगर पहले मेरे घर का काम तो निबटा दे, बातों ही बातों
मैं १२ .०० बज गए ,देख घडी की और. ‘’ कमला ने घडी की और देख ‘’ओ बाप रे !
आज तो सच मैं लेट हो गए, चलो ! कोई बात नहीं अभी निबटा देती हूँ सारा घर का काम “” इतना कहकर
कमला ने घर की पिछली बालकनी से
झाड़ू उठाई और शुरू हो गया उसका रोबोट की तरह
काम करना हो गया शुरू.. करीब आधे –ढेड़
घंटे में उसने सारा चौका-बर्तन ,सारे घर की सफाई,बर्तन ,सब कर डाला. तत्पश्चात
अरुणा ने चाय बनाकर उसे भी पिलाई और खुद भी पी. और कमला चाय पीकर अरुणा के घर से किसी दुसरे घर
मैं चली गयी काम करने . आज कमला बड़े जोश मैं थी इसीलिए उसे अपने ४ घर निबटाने मैं ज़ायेदा
समय ना लगा.
कमला तो यह
ठान बैठी थी की आज तो इस पार या उस
पार ,मान गया तो बहुत अच्छी बात और यदि नहीं माना तो .......
फिर सोच लेंगे ! मगर उसके घर
मैं घुसते से ही घर का नजारा
बहुत बदला –बदला लगा , और उसके मर्द
मोहन का भी हाव –भाव ,रवैया
,चाल-ढाल सब बदला हुआ लग रहा था , . कमला को
आते देख वोह बड़े खुश होकर बोला ,’’ आ गयी तू, ! ‘’ हाँ ! आ गयी !’’ कमला ने बड़ी हैरानी से उसके चेहरे की मुस्कान को देखते हुए बोला. ‘’
तुम कब आये ‘’? अभी –अभी ! और इधर आ
,अरे इधर आ न ! तुझे एक चीज़ दिखानी है. ‘’
इतना कहकर मोहन कमला का हाथ पकड़कर उसे अपने कमरे मैं ले गया . घर भी साफ़ –सुथरा
तो कर रखा था ,मगर अपने कमरे को भी सजा
रखा था,प्यारे-प्यारे गुड्डे-गुड़ियों से , सॉफ्ट टोयेस से , बच्चियों की सुंदर-सुंदर तस्वीरों से
दीवारें सजा राखी थी ,और एक दिवार मैं देश की दो
महान नारियों (श्रीमती इंदिरा गाँधी जी और झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई ) की बड़ी-बड़ी
तस्वीरें टांग रखी थी . कमला यह सब देखकर
एक दम हैरान हो गयी ,मुंह से बोल
ही नहीं निकल रहे थे , यह ह्रदय –परिवर्तन
तो अप्रत्याशित था, यह अचानक इतना बड़ा बदलव कैसे ? उसके मन की दशा को ताड़ते
हुए मोहन ने कहा ,’’ क्यों हैरान कर दिया
ना, ,वोह कहते हैं ना अंग्रेजी मैं ,क्या कहते हैं? हाँ सरप्राइज !! है ना !
‘’ अरे यार ! तुझे क्या बतायुं ,
इन महान औरतों के बारे मैं जब मैने
सुबह टीवी मैं सूना ,तो हैरान हो गया, सोचा ,अरे यह भी औरतें ही हैं, जब यह
इतनी बहादुर हो सकती हैं, तो हमारी बेटी क्यों नहीं. आज पता है अंतराष्ट्रीय महिला
दिवस है ,इसीलिए टीवी और रेडियो मैं भी
शक्तिशाली और महान औरतों के जीवन-परिचय
के बारे मैं बताया जा रहा था. अन्तरिक्ष मैं जाने वाली हमारे देश की
पहली अन्तरिक्ष यात्री ,कल्पना चावला ,वोह
भी तो औरत थी, हमारे देश की पहली राष्ट्रपति सुमित्रा महाजन, और तो और हमारे देश की विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा
स्वराज, हमारे देश की रक्षा मंत्री
सीतारमैया भी औरत, ,इनसब मैं जगदम्बे दुर्गा निवास करती है ,वही जगदम्बे मन जिन्होंने बड़े-बड़े ,भयंकर राक्षस मार गिराए. जो किसी से
नहीं डरती , ना मुश्किल हालात से, ना किसी
मर्द की जात से. मर्द इनसे डरते हैं. तो मैं भी सोच लिया की हम इस नन्ही सी कलि को दुनिया मैं आने देंगे ,
इसे दुर्गा माँ क प्रसाद समझकर सर आँखों पर लगायेंगे, इसका
पालन-पोषण बहुत अच्छे ढंग से करेंगे, इसको पढ़ाएंगे,लिखाएंगे और आईएस अफसर बनायेंगे . बेशक समाज मैं गुंडे,बदमाशों, लोफरों, का बोलबाला है, भले ही
मर्द के चेहरे के पीछे वेह्शी/दरिंदा छुपा
हुआ हो ,कोई परवाह नहीं, हमें ऐसे मैं अपनी बेटियों को बल्कि और मजबूत बनाना
चाहिए , रणचंडी दुर्गा की तरह उसे शक्तिशाली
बनाने की तालीम देनी चाहिए. न की उसे घर
मैं कैद करके रखना चाहिए या गर्भ मैं मार डालना चाहिए,वोह भी इन शैतानो के डर से !
नहीं! बिलकुल नहीं. ! हमारी बेटी दुनिया
मेब आएगी और ज़रूर आएगी . और एक शक्ति शाली
पुलिस अफसर बनकर समाज से अपराधियों का
सफाया करेगी. और उसका नाम भी मैने सोच
लिया है ,’’ बता क्या ? कमला जो अब तक
उसकी बातों से काफी प्रभावित हो चुकी थी ,
और बहुत खुश भी ,ख़ुशी के मारे उसकी
पलकें भीग गयी थी. उसके होठों से
आचानक निकला ‘’दामिनी’’ ! अरे वाह ! तूने तो मेरे मन की बात कर दी. मेरे मन भी यही
नाम चल रहा था ,’’दामिनी ‘’ .यानि बिजली . हमारी बेटी इस नाम को सार्थक करेगी.
बिजली बनकर टूट पड़ेगी इन साले इंसान की
खाल मैं छुपे खूंखार भेड़ियों पर. ‘’ क्यों है ना ! हमारी दामिनी
बनेगी आम औरतों,बच्चियों ,बहनों के
लिए प्रेरणा, उनकी शक्ति भी और उनका साहस और उनकी सरंक्षक भी बनेगी. ‘’ उस
रात मियां –बीवी दोनों ही नहीं सोये ,अपनी अजन्मी बेटी के दुनिया में आने का इंतज़ार करने लगे, उसके जीवन को अपने प्यार
से, लाड, शिक्षा,संस्कारों से , देखभाल और उचित पालन-पोषण के सपने सजाने लगे.और जिन आँखों मैं सपने तैरने
लगे उनमें भला नींद के लिए जगह कहाँ
अगले दिन जब कमला
सोकर उठी तो बहुत उत्साहित थी, और बहुत
प्रसन्न भी . बड़े उत्साह से उसने अपने घर का काम निबटाया ,अपने पति को बड़े
प्यार से ,काम पर भेजा और खुद भी तैयार
होकर आज भी सबसे पहले अरुणा के घर गयी . अरुणा
भी रोज़ के तरह अपना काम निबटा कर कमला का ही इंतज़ार कर रही थी. उसके दरवाज़ा
खोलते ही उसने सारी राम कहानी अरुणा को
बता दी. अरुणा भी पहले तो हैरान हो गयी मगर खुश भी बहुत हुई.
कल से आज तक समय में उसके जीवन मैं भी एक क्रांतिकारी परिवर्तन आया
हुआ था. कल से कमला के जाए के बाद वोह जिस मानसिक उधेड़बुन में थी.
उसका अंत उसने बड़े
निर्णायक ढंग से लिया. उसके अन्दर भी
एक अलोकिक शक्ति ने जन्म लिया और
अपनी सारी कमजोरियों को ,अपने सारे डर को जीतते हुए उसने भी एक फैंसला किया था ,
कब तक इस तरह समाज मैं डरकर कोई जी सकता है, और ना ही अपनी बेटियों,बहनों को
कोई कैद करके रख सकता है. कैद होना होगा
तो अब मर्दों को. वेह्शी /दरिंदों को ,वोह
भी जेल की सलाखों के पीछे. हम अपनी बेटिओं पर कोई पाबन्दी नहीं लगायेंगे, वोह क्या
पहने ,क्या ना पहने ,कहाँ जाये ,कहाँ ना जाये, ‘’ अब पाबन्दी लगायेंगे लोग अपनी बिगड़ी औलादों पर लोफर टाइप के लड़कों पर. मैं इसके लिए पहले खुद आत्म-रक्षा का प्रशिक्षण
लुंगी, और फिर अपनी बाकि बहनों,बेटियों और
बच्चियो को सिखायुंगी. और इस प्रशिक्षण से उन्हें वोह ताकत ,वोह आत्मबल जगायुंगी की उन्हें किसी भी मर्द जात मैं छुपे भेड़ियों से
डरने की कोई ज़रूरत नहीं. वोह उनको पल मैं पछाड़ सकती हैं. और समाज की अन्य औरतों के
लिए भी प्रेरणा बनेगी और ना बल्कि प्रेरणा बनेगी ,समय आने पर उनकी रक्षा भी करेगी.
और मेरी संस्था का नाम होगा ‘’दामिनी’’ . ‘ और उसके इस निर्णय का स्वागत किया उसके
पति विवेक ने और अपना पूरा सहयोग देने का वायदा भी किया. अब जैसे समय गुज़रता चला गया दोनों दामिनियाँ
अपने-अपने परिवेश मैं पल-बढ़ रही थी. एक साधारण से गरीब मजदूर के घर ,और
एक सशक्त महिला अरुणा की संस्था के रूप मैं. उद्देश्य मात्र एक
मर्दों के समाज मैं नारी विषयक
सभी अपराधों,ज़ुल्मों का सफाया करना
. उन्हें देश मैं ,समाज मैं उचित सम्मान /अधिकार और अपनी स्वेच्छा से जीने की
आज़ादी दिलवाना.